ध्यान की यात्रा
यह समस्त सृष्टि , प्रकृति , अंतरिक्ष, प्रकृति में घटित विभिन्न परिवर्तन , वनस्पति जगत, प्राणी जगत, मनुष्य का जीवन, जीवन में घटित विभिनन् घटनाक्रम – स्वयं में अत्यंत रहस्यात्मक हैं | प्राचीन समय से ही उपरोक्त विषयों के प्रति मनुष्य के भीतर विभिन्न जिज्ञासाएं जन्म लेती रही हैं, प्रश्नों की लहरें उभरती रही हैं तथा उनका समाधान प्राप्त करने के लिए वह सदा से ही आतुर रहा है | जिज्ञासा समाधान की इस श्रंखला में दो धराएं मुख्य रहीं --- विज्ञान और अध्यात्म | विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों तथा खोजों ने अनेक रहस्य उद्घटित किए किंतु उनके पश्चात भी बहुत से रहस्यों का अनावरण नहीं हों पाया | विज्ञान आज भी अनेक प्रयोग कर रहा है | विज्ञान से भी आगे एक और धारा जो हमारे भारत की विशषता रही है --- वह है हमारा अध्यात्म
अध्यात्म के क्षेत्र में , ध्यान के क्षेत्र में जो प्रयोग हमारे ऋषि मुनियों ने किए , सिद्धों ने किए तथा उनके फलस्वरूप जो रहस्य उद्घटित हुए , वे विलक्षण हैं | विज्ञान के प्रयोगों की एक सीमा रेखा है , विज्ञान स्थूल स्थर पर कार्य करता है | जहाँ जाकर विज्ञान समाप्त हो जाता है , वहाँ से अध्यात्म प्रारम्भ होता है | अध्यात्मिक प्रयोगों ने ऎसी ऎसी गुत्थियाँ सुलझाई हैं कि जानकर आश्चर्य होता है | मानव जीवन की विभिन्न समस्याओं का समाधान , मानव के विकास की विभिन्न समस्याएं, मानव के भीतर छिपी अदभुत शक्तियों के जागरण आदि में अध्यात्म का जो योगदान है , वह अद॒भुत है | विचारों को शक्ति , मंत्रों कों शक्ति , ध्यान से उत्पन्न विधुत तरंगों की शक्ति, कुंडलिनी शक्ति आदि – आदि विभिन्न् रहस्यों के विषय में जब हम जानते हैं तो मन आश्चर्य से परिपूर्ण हों जाता है | ध्यान के क्षेत्र में प्रवेश के पश्चात॒ साधकों कों अनेक प्रकार की अनुभूतियां होती हैं |
ध्यान का क्षेत्र शब्दों का नही , अनुभूतियों का क्षेत्र है | ध्यान अनुभूतियों का विषय है | जब साधक किसी कुशल मार्गदर्शन में ध्यान में प्रवेश करता है तो वह अपने भीतर छिपे परम के सौंदर्य कों देखकर, परम सत्ता की विभिन्न झलकियों को पाकर आनंदित हों उठता है | उसके समक्ष एक के बाद एक रहस्य खुलते चले जाते हैं तथा वह उनके आकर्षण में आकर्षित होता चला जाता है | जो सौंदर्य हमें बाहर दिखाई देता है उससे कई गुणा अधिक सौंदर्य , दिव्य सौंदर्य भीतर है किंतु उसे देखने के लिए भीतर की आँख चाहेये | वह आँख खुलती है ध्यान के सागर में डूबकी लगा कर तथा जब यह आँख खुलती है तो सब कुछ इतना सुंदर , इतना आनन्ददायक , इतना प्यारा लगने लगता है कि जीवन का अर्थ ही बदल जाता है | चारों ओर जैसे आनंद का साम्राज्य छा जाता है | सांसारिक तथा आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में सफलता के द्वार खुलने लगते हैं | मुखमंडल पर चिरस्थायी मुस्कान खिलने लगती है | व्यक्ति जहाँ जाता है अपने चारों ओर स्वर्ग निर्मित कर लेता है |
अतः ध्यान में प्रवेश करने का प्रयास कीजिए | कितना जीवन यूं ही बीत गया , होश में आइए | अपने बंद कक्ष से बहार आइए | आनंद की रिमझिम फुहार आपकी प्रतीक्षा कर रही है | ध्यान में उतरिये तथा अपने जीवन को सार्थक कीजिए |
Hariom Guru Archna Didi
ReplyDeleteध्यान गुरू अर्चना दीदी के श्रीचरणों में श्रद्धा नमन
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